Sunday, December 7, 2025

68 Pakistani terrorist launchpads are active along the Line of Control, 20 terrorists are preparing to infiltrate into India





Akshat Shrotry

Sixty-eight launchpads are active in the Pakistan-occupied territory along the Line of Control (LoC) in Jammu and Kashmir. Between 110 and 120 terrorists are preparing to infiltrate into Jammu and Kashmir from these locations. Intelligence agencies have provided this exclusive information to Dainik Bhaskar.

According to sources, infiltration attempts may increase in the coming weeks. Security has been further tightened in several sensitive areas along the LoC. Surveillance has been increased in all sectors to prevent terrorists from even approaching the border.

Officials said that Pakistan-backed terrorists are continuously being sent towards the LoC, but Indian security agencies are fully prepared. All forces have been given strict instructions to thwart every infiltration attempt at the border itself.

Patrolling has been increased in the border villages and forward posts. Field units have been ordered to remain more vigilant and take immediate action against any suspicious activity.

To prevent infiltration, security forces have further strengthened their counter-infiltration grid. The border is now equipped with night vision cameras, drone surveillance, thermal sensors, ground sensors, increased patrolling, and additional troops.

Earlier, on November 30, an annual press conference was held at the BSF campus in Jammu. During the conference, Shashank Anand, IG of the BSF's Jammu Frontier, stated, "So far in 2025, the BSF has destroyed 118 Pakistani posts. The government has given us a target of zero infiltration. We will achieve it."

Meanwhile, BSF DIG Vikram Kunwar said that during Operation Sindoor, the BSF destroyed several terrorist launch pads, after which Pakistan shifted more than 72 terror launch pads away from the border. These include 12 active launch pads in Sialkot-Zafarwal and 60 active launch pads in other locations. However, all of them are now located away from the border.

Thursday, October 2, 2025

पीओके के सामने झुके शहबाज, बातचीत के लिए भेजा दल, कई सालों से किया जा रहा है पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर का शोषण

 


इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद सरकार झुकती नजर आ रही है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रास्ता निकालने के लिए जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएसी) से बातचीत शुरू की है। हालांकि उच्च-स्तरीय प्रयासों के बावजूद शरीफ सरकार की जेएसी और पीओके सरकार के बीच बातचीत बहुत आगे नहीं बढ़ सकी है। गुरुवार को तीनों पक्ष बातचीत के लिए बैठे लेकिन वार्ता कुछ समय बाद ही रुक गई।

जेएसी नेता शौकत नवाज मीर ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार को कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हटाते हुए मोबाइल-इंटरनेट सेवा बहाल करनी चाहिए। कमेटी ने साफ किया है इसके बिना बातचीत जारी नहीं रखी जा सकती है। दूसरी ओर पाक सरकार के प्रतिनिधियों ने चीजें ठीक होने और शांति लौटने की उम्मीद जताई है। सरकार का कहना है कि जो कुछ बातचीत हुई है, वह अच्छे माहौल में हुई और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनी।

पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि वह पीओके के लोगों की जायज मांगों में उनके साथ है। हम चाहते हैं कि समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए, सड़कों पर टकराव से ये नहीं होगा। शहबाज शरीफ के कार्यालय की ओर से कहा गया है कि इस्लामाबाद से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पीओके भेजा गया है। बयान में कहा गया है कि शहबाज सरकार लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए तैयार है।

शहबाज शरीफ सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब जेएसी ने विभिन्न मांगों को लेकर पीओके में हड़ताल बुलाई है। इसके चलते पूरा पीओके ठप्प पड़ा है। पीओके में विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई है। सुरक्षाबलों ने आम लोगों पर गोली चलाई है तो कई जगहों पर सुरक्षाकर्मियों को पीटा गया है। पीओके में हिंसा के ताजा दौर में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।

पीओके में हिंसा पर अंतर्राष्ट्रीय अधिकार समूहों ने चिंता व्यक्त की है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान सरकार से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा करने, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से बचने और संचार प्रतिबंधों को हटाने का आग्रह किया। पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा पर चिंता जताई है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके के लोगों को धमकाते हुए कहा है कि आज आपके पास जो कुछ है, वह बहुत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाएं पंजाबी, पश्तून, सिंधी, बलूच, गिलगित और बाल्टिस्तान सभी ने कश्मीर के युद्धों में खून बहाया है।

Sunday, September 28, 2025

भारत का यह दोस्त लिथियम से हुआ मालामाल, मिला दुनिया का सबसे बड़ा भंडार




भारत के दोस्त देश जर्मनी में दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडारों में से एक की खोज हुई है। माना जा रहा है कि जर्मनी में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट का भंडार है। वैश्विक ऊर्जा कंपनी नेप्च्यून एनर्जी के अनुसार, यह संसाधन भंडार जर्मनी के उत्तरी सैक्सोनी-एनहाल्ट के अल्टमार्क क्षेत्र में स्थित है। यह कंपनी पिछले 55 वर्ष से प्राकृतिक गैस उत्पादन कर रही है। इस खोज को पूरे यूरोप के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अभी तक यूरोप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया चीन के लिथियम निर्यात पर आश्रित है। ऐसे में इस नई खोज से लिथियम को लेकर चीन पर निर्भरता कम हो सकती है।

नेप्च्यून एनर्जी के सीईओ एंड्रियास शेक ने कहा है कि यह नया खोज सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में कंपनी के लाइसेंस क्षेत्रों की महत्वपूर्ण क्षमता को उजागर करता है। उन्होंने बताया, "यह हमें महत्वपूर्ण कच्चे माल लिथियम के लिए जर्मन और यूरोपीय आपूर्ति बाजार में महत्वपूर्ण योगदान करने में सक्षम बनाता है।" यह खोज अंतर्राष्ट्रीय और स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसी स्प्राउल ERCE को सौंपे जाने के बाद हुई है। इस एजेंसी ने बताया है कि जर्मनी में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट का भंडार मौजूद है।

जर्मनी के सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में स्थित ऑल्टमार्क बेसिन लंबे समय से प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए एक प्रमुख स्थल रहा है। यह कभी यूरोप के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक पर्मियन बेसिन का हिस्सा है जो उत्तरी जर्मनी से होते हुए रूस, यूक्रेन और पोलैंड तक फैला हुआ है। नेप्च्यून एनर्जी और उसकी पूर्ववर्ती कंपनियों ने 1969 से इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है। अब हालिया आंकड़े अब दर्शाते हैं कि विशाल ऑल्टमार्क गैस क्षेत्र से रोटलीगेंड ब्राइन न केवल अत्यधिक खनिजयुक्त हैं, बल्कि लिथियम से भी अत्यधिक समृद्ध हैं।

स्प्राउल ERCE ने बताया है कि इस इलाके में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट मौजूद है। इस पर नेप्च्यून एनर्जी का कहना है, "इसका मतलब है कि दुनिया के सबसे बड़े परियोजना-आधारित लिथियम संसाधनों में से एक उत्तरी सैक्सोनी-एनहाल्ट में स्थित है।" तुलना के लिए, अर्जेंटीना, बोलीविया और चिली के बीच साझा लिथियम त्रिभुज में दुनिया के 53 प्रतिशत लिथियम संसाधन मौजूद हैं। इसमें लगभग 50 मिलियन टन क्षारीय धातु है।

भारत के जर्मनी के साथ मजबूत संबंध हैं। दोनों देश न केवल व्यापार बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी एक दूसरे का साथ दे रहे हैं। भारत, जर्मनी के इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्र बिंदु हैं। भारत और जर्मनी के संबंध समान लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित मज़बूत और विश्वसनीय साझेदारी पर टिके हैं, जो आर्थिक, राजनीतिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है और दोनों देश जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, और स्थायी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार महत्वपूर्ण है, और जर्मनी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक प्रमुख स्रोत है।

Monday, September 1, 2025

आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड ने नए केंद्र के शुभारंभ के साथ मुजफ्फरनगर में अपनी उपस्थिति का किया विस्तार



मुजफ्फरनगर। आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (एईएसएल), जो नीट और जेईई की परीक्षा की तैयारी के लिए देश की एक प्रमुख कंपनी है, ने मुजफ्फरनगर में अपना नया सेंटर शुरू करने की घोषणा की है। इस सेंटर में 7 क्लासरूम हैं, जहाँ सुबह और शाम के दोनों बैचों में 550 से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर सकते हैं। उद्घाटन समारोह में एईएसएल रीजनल डायरेक्टर डीके मिश्रा उपस्थित थे। 

मुजफ्फरनगर में कमल कॉम्प्लेक्स, एस.बी.आई. बैंक के बगल में, रेलवे स्टेशन के सामने, दूसरी मंजिल पर स्थित यह नया क्लासरूम सेंटर मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। नीट और जेईई कोचिंग के अलावा, यह सेंटर छात्रों को ओलंपियाड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फाउंडेशन-लेवल कोर्स भी उपलब्ध कराएगा, जिससे उनके शैक्षणिक आधार को मजबूत किया जा सके।

लॉन्च के बारे में बात करते हुए एईएसएल के रीजनल डायरेक्टर डीके मिश्रा ने कहा, "हमें मुजफ्फरनगर में अपने नए केंद्र के उद्घाटन की घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है, जो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग देने के हमारे मिशन में एक अहम कदम है। हमारा फोकस छात्रों को मजबूत शैक्षणिक नींव, स्पष्ट सोच और नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए आत्मविश्वास से सशक्त बनाने पर है। यह केंद्र अनुभवी शिक्षक, व्यापक अध्ययन सामग्री और छात्रों की क्षमता को अधिकतम करने के लिए एक उत्तम सीखने का माहौल प्रदान करेगा। हमें विश्वास है कि हर छात्र, चाहे वह कहीं भी हो, बेहतरीन शिक्षा और संसाधनों का हकदार है, और यह विस्तार हमारे इस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

इस विस्तार के साथ एईएसएल का उद्देश्य क्षेत्र के अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। यह रणनीतिक कदम शीर्ष स्तरीय तैयारी सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया है, ताकि और अधिक महत्वाकांक्षी छात्र उच्च गुणवत्ता वाली कोचिंग तक पहुंच सकें, जो आकाश इंस्टीट्यूट की पहचान है।

एईएसएल को देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल (नीट) और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (जेईई) के साथ-साथ एनटीएसई और ओलंपियाड जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्टता प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों के लिए गहन और प्रभावी तैयारी कार्यक्रम प्रदान करने के लिए जाना जाता है। यह संस्थान उच्च गुणवत्ता वाली परीक्षा तैयारी सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो छात्रों को अपनी पूरी क्षमता तक पहुँचने और उनके शैक्षणिक लक्ष्यों में सफलता हासिल करने के लिए सशक्त बनाती हैं। 

Saturday, August 30, 2025

डोनाल्ड ट्रंप हैं लापता, क्या बदलने वाला है अमेरिका का राष्ट्रपति....

 



बाशिंग्टन, 30 अगस्त: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गायब होने की खबर ने हड़कंप मचा दिया है। पिछले कई दिनों से उनका स्वास्थ्य खराब होने की चर्चाएं थीं। इस बीच उनके लापता होने की खबरों ने ह्वाइट हाउस से लेकर पूरे अमेरिका में हड़कंप मचा दिया है।

 

पिछले कई दिनों से डोनाल्ड ट्रंप की सार्वजनिक उपस्थिति नहीं देखी गई है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऑनलाइन चर्चाओं में यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ‘सार्वजनिक दृश्य से गायब’ हो गए हैं। हालांकि, यह अटकलें ज़्यादातर गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा फैलाई जा रही हैं। व्हाइट हाउस ने इस मामले पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

 

डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई दिनों से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। जबकि आमतौर पर वह मीडिया में कुछ न कुछ बयान देते रहते हैं, लेकिन करीब 2 दिनों से वह पूरी तरह नदारद हैं। दावा किया जा रहा है कि अगले 2 दिनों तक यानि आज 30 और 31 अगस्त तक उनका कोई कार्यक्रम भी नहीं है, जिसमें उनकी मौजूदगी का उल्लेख हो। अभी उनका कोई भी सार्वजनिक आयोजन सूचीबद्ध नहीं है। इससे अटकलों को और बल मिला है।

 

डोनाल्ड ट्रंप के नदारद होने से इसलिए भी हलचल मच गई है कि अभी 1 दिन पहले ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक इंटरव्यू में सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कोई ट्रेजडी होती है तो वह अगले राष्ट्रपति का पद संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। जेडी वेंस ने कहा था कि उन्हें इसके लिए बकायदे प्रशिक्षण भी मिला है। हालांकि वेंस ने यह भी जोड़ा था कि फिलहाल ट्रंप के साथ ऐसा कुछ होने नहीं जा रहा है, वह अभी स्वस्थ हैं और अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। मगर फिर भी कोई अपरिहार्य परिस्थिति बनती है तो वह राष्ट्रपति का दायित्व निभाने से पीछे नहीं हटेंगे।

 

ट्रंप के सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुपस्थिति की वजह कहीं लेबर डे तो नहीं है, जो आगामी 1 सितंबर को मनाया जाएगा। वॉशिंगटन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर डे को लेकर शुरुआत में ट्रंप की योजना थी कि वह अगस्त के अंतिम दो हफ्ते बेडमिन्स्टर, न्यू जर्सी स्थित अपने रिसॉर्ट में बिताएंगे, लेकिन उन्होंने वह योजना रद्द कर दी और व्हाइट हाउस में ही रहने का निर्णय लिया।

 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 79 साल के हो चुके हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर लोगों को चिंता हो रही है। हाल ही में ट्रंप को हाथ पर एक नीले निशान के साथ देखा गया था। इससे पहले भी उन्हें मेकअप के जरिए निशान छुपाते हुए देखा गया था। उनके चिकित्सक शॉन बार्बाबेला ने स्वीकार किया कि ट्रंप के हाथ पर सूजन के हल्के लक्षण हैं और यह लगातार हाथ मिलाने और एस्पिरिन के सेवन से होने वाली हल्की सॉफ्ट टिशू इरिटेशन के कारण हो सकता है।


#uspresidenrchange


Wednesday, July 16, 2025

क्या पाकिस्तान में फिर से है तख्ता पलट की तैयारी, आसीम मुनीर बनने जा रहे हैं राष्ट्रपति !





इस्लामाबाद: पाकिस्तान में हाई लेवल बैठकों का दौर जारी है। जिसने इस्लामाबाद में राजनीतिक तूफान पैदा कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस्तीफा दे सकते हैं।

 

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद में मंगलवार शाम को राजनीतिक गलियारों में काफी तेज हलचल देखी गई है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हुईं हैं।

 

इन बैठकों ने सोशल मीडिया और सियासी हलकों में यह अटकलें तेज कर दीं हैं, कि क्या देश की राजनीतिक व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव आने वाला है।

 

अटकलें लगाई जा रही हैं कि राष्ट्रपति जरदारी का इस्तीफा हो सकता है या फिर देश में संसदीय प्रणाली को खत्म कर राष्ट्रपति प्रणाली की शुरूआत की जा सकती है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री आवास में सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। उससे कुछ ही देर पहले उन्होंने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ बैठक की थी।

 

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि असीम मुनीर जल्द ही आसिफ अली जरदारी की जगह ले सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान के संविधान में 27वां संशोधन किए जाने की रिपोर्ट आ रही हैं और कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति जरदारी पद छोड़ सकते हैं और शायद राष्ट्रपति पद के लिए किसी उत्तराधिकारी के लिए रास्ता साफ कर सकते हैं।

Sunday, July 13, 2025

भडास4मीडिया वाला य़शवंत करता है पत्रकारिता की दलाली





नई दिल्ली: आपने भडास4मीडिया का नाम सुना होगा यह तथाकथित बैवसाइट यूं तो मीडिया से जुड़े तथ्यों को प्रकाशित करता है परंतु इसका एक धंधा यह भी है कि यह कई अच्छे पत्रकारों का नाम खराब करने के लिये दुसरे संस्थानों से दलाली कै पैसा भी उठाता है। मेरा भी नाम खराब करने के लिये भी एक संस्थान से इसने पैसे लिये थे। इसका एडिटर यशवंत सिंह है जो पीएम और योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणीयां करता रहता है। यह कोई पत्रकार नहीं दुसरे का नाम खराब करने वाला दलाल है।

Thursday, July 3, 2025

भारत की पहली मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर खेला मैच





नई दिल्ली, जुलाई 2025: भारत की मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट टीम ने इस सप्ताह इतिहास रच दिया, जब टीम पहली बार लॉर्ड्स के मैदान पर उतरी। वर्तमान में चल रही सीरीज़ के तहत यह मैच ऐसी टीम के साथ खेला गया, जो तकरीबन आठ सालों से मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट खेल रही है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत ने विश्वस्तरीय मंच पर इस फॉर्मेट में आधिकारिक प्रवेश कर लिया है।


इस अवसर पर स्वयं की संस्थापक चेयरपर्सन सुश्री स्मिनु जिंदल को इंग्लैण्ड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड द्वारा आयोजन स्थल पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया। सात क्रिकेट बोर्ड्स के अधिकारियों के समक्ष भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने न सिर्फ सुगम्यता, बल्कि अवसरों एवं पारदर्शिता के संदर्भ में भी समावेशी खेल नियोजन के लिए मजबूत प्रयासों का आह्वान किया।


जिंदल ने कहा, "लॉर्ड्स में जो कुछ भी हो रहा है, वह आकस्मिक नहीं बल्कि प्रतीकात्मक है। इस मैदान ने क्रिकेट के सबसे बेहतरीन पलों को देखा है। आज यह समावेशन को देख रहा है।"


खेलों में डीसीसीआई के साथ स्वयं की साझेदारी 2021 में शुरू हुई, इस साझेदारी के तहत कई आयोजन किए जा चुके हैं। पिछले सालों के दौरान यह टोकियो पैरालिम्पिक्स से लेकर पीडी चैम्पियनशिप और खेलो इंडिया पैरा गेम्स जैसे आयोजनों तक लगातार विकसित हुई है।


यह टूर्नामेन्ट डिसेबिलिटी क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीसीआई) के सालों के अथक प्रयासों का परिणाम है, जिसने शारीरिक, बौद्धिक एवं श्रवण दिव्यांगता से युक्त खिलाड़ियों के साथ मिलकर काम किया है। लॉर्ड्स के मैदान पर टीम का उतरना भारत की मिक्स्ड डिसेबिलिटी क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह एक ऐसा फॉर्मेट है, जिसे मुख्यधारा में लाने के लिए हमें लम्बी दूरी तय करना है, हालाँकि इसमें करियर की ढेरों संभावनाएँ हैं।


भारतीय मैन्स क्रिकेट टीम इंग्लैण्ड का दौरा भी कर रही है। दोनों स्क्वैड्स विभिन्न फॉर्मेट्स में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य सीरीज़ जीतना और समावेशन को बढ़ावा देना है। वे एक साथ मिलकर विश्वस्तरीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।


अपने भाषण के दौरान जिंदल ने ऐलान किया कि स्वयं इसी नवंबर में एक्सेसिबल स्पोर्ट्स एण्ड टूरिज्म पर भारत के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भी करेगा। इस सम्मेलन में नीति, खेल, आतिथ्य एवं दिव्यांगता से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा लेकर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। यह खासतौर पर इसलिए भी मायने रखता है, क्योंकि भारत 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स एवं 2036 ओलम्पिक्स की तैयारियों में जुटा है।


स्वयं और डीसीसीआई के लिए लॉर्ड्स का यह पल न सिर्फ एक बड़ी उपलब्धि बल्कि एक लम्बी यात्रा है। एक ऐसी यात्रा जिसका उद्देश्य हर प्रकार के खिलाड़ियों के लिए, हर प्रकार के पिच पर खेलों को सुगम्य बनाना है।

Wednesday, July 2, 2025

चोर को दे दी तिजोरी की जिम्मेदारी, क्या है पाकिस्तान के यूएन में अध्यक्ष बनने के पीछे की डिपलोमेसी?






Akshat Shrotry

Defense Expert

इस्लामाबाद: कहते हैं कि जब तिजोरी को चोर के हाथों से बचाना हो तो उसकी जिम्मेदारी चोर को ही दे दो ताकि चोरी करने से पहले वो 100 बार सोचे। कुछ ऐसा ही हुआ पाकिस्तान के साथ यूएन सिक्योरिटी काऊंसिल के नोन पर्मानैंट मेंबर की टेरररिज्म कमेटी का अध्यक्ष पाकिस्तान को नियुक्त किया गया है। इस पूरे वाक्य में आपको हंसी भी आयेगी और आप सोचेंगे कि जो देश खुद आतंकवाद को पालता है पैदा करता है वो कैसे इस जिम्मेदारी को निभा पायेगा।

 

इस पूरे मामले को समझने के लिये आप यह जान लिजिये कि अगर पाकिस्तान भारत में कुछ भी हिमाकत करता है तो वो यूएन में बिछाये अपने झुठे जाल में खुद ही फंस जाएगा। वो इंकार भी नहीं कर पाएगा कि इसके पीछे नहीं है।

 

पाकिस्तान ने मंगलवार को कहा कि उसने कानून और बहुपक्षवाद के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए उद्देश्य, विनम्रता और दृढ़ विश्वास की भावना के साथ जुलाई महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ग्रहण की है।

 

सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता - विश्व निकाय का शक्ति केंद्र - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में पाकिस्तान के दो साल के कार्यकाल का हिस्सा है, जो जनवरी 2025 में शुरू होगा।

 

पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सदस्यता में भारी समर्थन के साथ एक अस्थायी सदस्य के रूप में चुना गया, जिसमें 193 में से 182 वोट प्राप्त हुए। अध्यक्षता इसके 15 सदस्यों के बीच वर्णमाला क्रम में मासिक रूप से बदलती रहती है।

 

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "पाकिस्तान इस जिम्मेदारी को उद्देश्य, विनम्रता और दृढ़ विश्वास की गहरी भावना के साथ लेता है। हमारा दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों, अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान और बहुपक्षवाद के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता पर आधारित रहेगा।"

 

राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद ने संयुक्त राष्ट्र में राज्य संचालित एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान (एपीपी) संवाददाता से कहा, "पाकिस्तान की अध्यक्षता पारदर्शी, समावेशी और उत्तरदायी होगी।" राजदूत इफ्तिखार, जो जुलाई में प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे, ने कहा कि वे जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य, बढ़ती अस्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरों से पूरी तरह अवगत हैं, जो बढ़ते संघर्षों और गहराते मानवीय संकटों से चिह्नित हैं।

 

वे पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिल चुके हैं और उन्हें जुलाई में परिषद के कार्य कार्यक्रम के बारे में जानकारी दे चुके हैं। साक्षात्कार में पाकिस्तानी दूत ने कहा, "एक ऐसे देश के रूप में जिसने लगातार संवाद और कूटनीति की वकालत की है, पाकिस्तान सुरक्षा परिषद के काम में एक सैद्धांतिक और संतुलित दृष्टिकोण लाता है, जो उसके अपने अनुभव और संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना और शांति निर्माण प्रयासों में दीर्घकालिक योगदान से आकार लेता है।"

 

उन्होंने कहा, "हम चार्टर के तहत अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी और व्यापक संयुक्त राष्ट्र सदस्यता की अपेक्षाओं के अनुरूप परिषद द्वारा सामूहिक, समय पर कार्रवाई के लिए सभी परिषद सदस्यों के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं।"

 

विदेश कार्यालय के बयान में आगे कहा गया है कि प्रेसीडेंसी जुलाई के दौरान दो उच्च-स्तरीय हस्ताक्षर कार्यक्रम आयोजित करेगी: 22 जुलाई को 'बहुपक्षवाद और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना' पर एक खुली बहस; और 24 जुलाई को निर्धारित 'संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों के बीच सहयोग: इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)' पर एक ब्रीफिंग।

 

दोनों बैठकों की अध्यक्षता पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार करेंगे, जो 23 जुलाई को फिलिस्तीन के प्रश्न पर तिमाही खुली बहस की अध्यक्षता भी करेंगे।

 

विदेश कार्यालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान परिषद के चार्टर की जिम्मेदारियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपेक्षाओं के अनुरूप समय पर और एकजुट कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए सभी परिषद सदस्यों के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है।

 

परिषद में पाकिस्तान का पिछला कार्यकाल 2012-13, 2003-04, 1993-94, 1983-84, 1976-77, 1968-69 और 1952-53 में था।

Tuesday, July 1, 2025

थाईलैंड में बड़ा राजनीतिक फेरबदल, प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न को अदालत ने किया निलंबित





Akshat Shrotry

Defense Expert

नई दिल्ली: थाईलैंड में बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला है। थाईलैंड प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को देश के संवैधानिक न्यायालय ने मंगलवार को निलंबित कर दिया, क्योंकि न्यायालय ने कंबोडिया के साथ राजनयिक विवाद में उनके आचरण की जांच शुरू की थी।

 

"संवैधानिक न्यायालय ने 7-2 के बहुमत से प्रतिवादी को 1 जुलाई से प्रधानमंत्री पद के कार्य से निलंबित कर दिया है, जब तक कि संवैधानिक न्यायालय अपना फैसला नहीं सुना देता," एक बयान में कहा गया, जब रूढ़िवादी सीनेटरों के एक समूह ने पैतोंगतार्न पर कंबोडिया के साथ सीमा विवाद के दौरान मंत्री पद की नैतिकता का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया।

 

लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय विवाद ने मई में सीमा पार संघर्ष को जन्म दिया, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक की मौत हो गई।

 

लीक हुई रिकॉर्डिंग के अनुसार, जब पैटोंगटार्न ने कंबोडियाई राजनेता हुन सेन को तनाव पर चर्चा करने के लिए बुलाया, तो उन्होंने उन्हें "चाचा" कहा और थाई सैन्य कमांडर को अपना "प्रतिद्वंद्वी" बताया, जिसके कारण काफी आलोचना हुई।

 

रूढ़िवादी सांसदों ने उन पर कंबोडिया के सामने झुकने और सेना को कमजोर करने का आरोप लगाया और आरोप लगाया कि उन्होंने मंत्रियों के बीच "स्पष्ट ईमानदारी" और "नैतिक मानकों" की आवश्यकता वाले संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया।

 

वह कॉल जिसने प्रधानमंत्री को पद से हटा दिया

 

विवाद थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा और कंबोडिया के पूर्व नेता हुन सेन - जो अब सीनेट के अध्यक्ष और वर्तमान प्रधानमंत्री हुन मानेट के पिता हैं - के बीच लीक हुई कॉल पर केंद्रित है।

 

यह कॉल 28 मई को थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर एक घातक सैन्य झड़प के कुछ ही दिनों बाद लीक हुई थी, जिसमें एक कंबोडियाई सैनिक मारा गया था। बाद में कंबोडियाई मीडिया द्वारा जारी की गई ऑडियो क्लिप में पैतोंगटार्न हुन सेन को "चाचा" कहकर संबोधित करते हुए और सीमा पर हुई झड़प में शामिल एक क्षेत्रीय थाई सेना कमांडर की आलोचना करते हुए दिखाई दे रही हैं।

 

उन्होंने कथित तौर पर हुन सेन से यह भी कहा, "अगर आपको कुछ चाहिए, तो मैं उसका ख्याल रखूंगी," इस बात पर थाई रूढ़िवादियों और सैन्य समर्थकों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिन्होंने उन पर राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता करने और एक विदेशी सरकार को खुश करने का आरोप लगाया।

 

आलोचकों का दावा है कि कॉल का लहजा और विषय-वस्तु खराब निर्णय और राष्ट्रीय सुरक्षा संकट के दौरान एक वर्तमान प्रधानमंत्री से अपेक्षित नैतिक आचरण का उल्लंघन दर्शाता है।

 

नैतिकता पर न्यायालय का फैसला - पैतोंगटार्न निलंबित

 

बढ़ते हंगामे के बाद, रूढ़िवादी सीनेटरों के एक समूह ने संवैधानिक न्यायालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि लीक हुई कॉल में पैटोंगटार्न के व्यवहार ने थाईलैंड के संविधान में उल्लिखित मंत्री पद की नैतिकता का उल्लंघन किया है।

 

न्यायालय ने मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई और 1 जुलाई को एक अंतरिम निलंबन आदेश जारी किया, जिससे जांच जारी रहने तक प्रभावी रूप से उनसे प्रधानमंत्री पद के सभी अधिकार छीन लिए गए। अपने संक्षिप्त बयान में, न्यायालय ने अंतिम निर्णय आने तक "शासन की अखंडता की रक्षा करने की आवश्यकता" का हवाला दिया।

 

यह अंतरिम उपाय उन्हें स्थायी रूप से पद से नहीं हटाता है, लेकिन गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट का संकेत देता है। राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (NACC) द्वारा एक अलग जांच भी शुरू की गई है, जिसके परिणामस्वरूप कदाचार साबित होने पर उन्हें पूर्ण अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

 

सीमा विवाद में क्या दांव पर लगा था?

 

कंबोडिया के साथ बढ़ते तनाव के बीच किए गए फोन कॉल के समय ने आग में घी डालने का काम किया। थाई-कंबोडियन सीमा पर लंबे समय से विवाद रहा है, खासकर प्रीह विहियर मंदिर के पास के इलाकों में। मई में हुई हालिया झड़प ने पुराने जख्मों को फिर से सुलगा दिया।

 

कंबोडिया ने दावा किया कि थाई सेना ने नियंत्रण रेखा पार की, जबकि थाईलैंड ने जोर देकर कहा कि वह उकसावे का जवाब दे रहा था। सख्त रुख अपनाने के बजाय, पैतोंगटार्न ने बैकचैनल कूटनीति का विकल्प चुना। लेकिन उनके शब्द लीक हो गए और व्यापक रूप से उन्हें विनम्र माना गया, जिससे थाई सेना और राष्ट्रवादी राजनेता नाराज हो गए।

 

भूमजैथाई पार्टी (एक प्रमुख गठबंधन सहयोगी) के सदस्यों सहित उनके आलोचकों ने उन पर थाईलैंड की गरिमा को कम करने और राष्ट्रीय हितों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। कॉल के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग हो गई।

जानिये कौन हैं बोद्ध धर्म गुरू दलाई लामा, उनके बाद कौन बनेगा उनका उतराधिकारी?




Akshat Shrotry

Defense Expert

धर्मशाला: बोद्ध धर्म गुरू Dalai Lama 6 जुलाई को 90 साल के होने वाले हैं ऐसे में सवाल है कि दलाई लामा के बाद कोन होगा उनका उत्तराधिकारी। इस सवाल पर सभी का अपना-अपना मत है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, जो रविवार, 6 जुलाई को 90 वर्ष के हो जाएंगे, उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता है, जिनके अनुयायी बौद्ध धर्म से परे भी हैं।

 

उनके चयन के पीछे की कहानी

 

तिब्बती परंपरा के अनुसार, एक वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु की आत्मा उसकी मृत्यु के बाद पुनर्जन्म लेती है।

 

14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई, 1935 को ल्हामो धोंडुप के रूप में हुआ था। उनका जन्म वर्तमान किंघई प्रांत के एक किसान परिवार में हुआ था। जब वे मात्र दो वर्ष के थे, तब उनकी पहचान पुनर्जन्म के रूप में हुई थी।

 

दलाई लामा की वेबसाइट के अनुसार, तिब्बती सरकार द्वारा भेजे गए एक खोज दल ने कई संकेतों के आधार पर यह निर्णय लिया था, जैसे कि एक वरिष्ठ भिक्षु को दिखाई गई एक दृष्टि। खोजकर्ताओं को तब यकीन हुआ जब उस बच्चे ने 13वें दलाई लामा के सामान को "यह मेरा है, यह मेरा है" वाक्यांश के साथ पहचाना।

 

1940 की सर्दियों में, ल्हामो थोंडुप को आज के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी ल्हासा के पोटाला पैलेस में ले जाया गया और आधिकारिक तौर पर तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता के रूप में स्थापित किया गया।

 

उनके उत्तराधिकारी का चयन कैसे किया जाएगा?

 

मार्च 2025 में प्रकाशित अपनी पुस्तक "वॉयस फॉर द वॉयसलेस" में दलाई लामा ने कहा कि उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर पैदा होगा।

 

माओत्से तुंग के कम्युनिस्टों के शासन के खिलाफ एक असफल विद्रोह से भागने के बाद, दलाई लामा 1959 से उत्तरी भारत में निर्वासन में रह रहे हैं।

 

उन्होंने लिखा कि वे अपने उत्तराधिकार के बारे में विवरण अपने 90वें जन्मदिन के आसपास जारी करेंगे। सोमवार को धर्मशाला में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा: "कुछ ऐसा ढांचा होगा जिसके भीतर हम दलाई लामाओं की संस्था की निरंतरता के बारे में बात कर सकते हैं"। उन्होंने विस्तार से नहीं बताया।

 

हिमालयी शहर धर्मशाला में स्थित निर्वासित तिब्बती संसद, दलाई लामा की तरह कहती है कि निर्वासित सरकार के लिए अपना काम जारी रखने के लिए एक प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि गादेन फोडरंग फाउंडेशन के अधिकारियों को उनके उत्तराधिकारी को खोजने और मान्यता देने का काम सौंपा जाएगा।

 

इसकी वेबसाइट पर कहा गया है कि वर्तमान दलाई लामा ने अपने धार्मिक और आध्यात्मिक कर्तव्यों के संबंध में "दलाई लामा की परंपरा और संस्था को बनाए रखने और समर्थन देने" के लिए 2015 में इस फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसके वरिष्ठ अधिकारियों में उनके कई सहयोगी शामिल हैं।

 

चीन क्या कहता है?

 

चीन का कहना है कि उसके नेताओं को शाही समय से विरासत के रूप में दलाई लामा के उत्तराधिकारी को मंजूरी देने का अधिकार है। एक चयन अनुष्ठान, जिसमें संभावित पुनर्जन्म के नाम एक स्वर्ण कलश से निकाले जाते हैं, 1793 में किंग राजवंश के दौरान शुरू हुआ था।

 

चीनी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि दलाई लामा के पुनर्जन्म का फैसला राष्ट्रीय कानूनों का पालन करके किया जाना चाहिए जो स्वर्ण कलश के उपयोग और पुनर्जन्म के जन्म को चीन की सीमाओं के भीतर निर्धारित करते हैं।

 

लेकिन कई तिब्बतियों को संदेह है कि चयन में चीन की कोई भूमिका समुदाय पर प्रभाव डालने की एक चाल है।

 

चीनी कम्युनिस्टों के लिए, जो धर्म को अस्वीकार करते हैं, "लामाओं के पुनर्जन्म की प्रणाली में हस्तक्षेप करना अनुचित है, दलाई लामा की तो बात ही छोड़िए।"

 

अपनी पुस्तक में, उन्होंने तिब्बतियों से कहा कि वे "किसी भी व्यक्ति द्वारा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चुने गए उम्मीदवार को स्वीकार न करें, जिसमें पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के लोग भी शामिल हैं," देश को उसके आधिकारिक नाम से संदर्भित करते हुए।

 

बीजिंग ने तिब्बती मुद्दे को जीवित रखने के लिए 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाले दलाई लामा को "अलगाववादी" करार दिया है और उनकी तस्वीर दिखाने या उनके प्रति किसी भी तरह की सार्वजनिक भक्ति दिखाने पर रोक लगा दी है।

 

मार्च 2025 में, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दलाई लामा एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जिन्हें "तिब्बती लोगों का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है"।

 

चीन तिब्बती लोगों के अधिकारों को दबाने से इनकार करता है और कहता है कि उसके शासन ने पिछड़े क्षेत्र में दासता को समाप्त किया और समृद्धि लाई।

 

भारत और अमेरिका क्या भूमिका निभा सकते हैं?

 

दलाई लामा के अलावा, भारत में 100,000 से ज़्यादा तिब्बती बौद्ध रहते हैं, जो वहां अध्ययन और काम करने के लिए स्वतंत्र हैं।

 

कई भारतीय उनका सम्मान करते हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में उनकी मौजूदगी नई दिल्ली को प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ एक तरह का लाभ देती है।

 

वैश्विक प्रभुत्व के लिए चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे अमेरिका ने बार-बार कहा है कि वह तिब्बतियों के मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

अमेरिकी सांसदों ने पहले कहा था कि वे चीन को दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन को प्रभावित करने की अनुमति नहीं देंगे।

 

2024 में, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने एक कानून पर हस्ताक्षर किए, जो तिब्बत की अधिक स्वायत्तता की मांगों पर विवाद को हल करने के लिए बीजिंग पर दबाव डालता है।