भारत के दोस्त देश जर्मनी में दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडारों में से एक की खोज हुई है। माना जा रहा है कि जर्मनी में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट का भंडार है। वैश्विक ऊर्जा कंपनी नेप्च्यून एनर्जी के अनुसार, यह संसाधन भंडार जर्मनी के उत्तरी सैक्सोनी-एनहाल्ट के अल्टमार्क क्षेत्र में स्थित है। यह कंपनी पिछले 55 वर्ष से प्राकृतिक गैस उत्पादन कर रही है। इस खोज को पूरे यूरोप के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अभी तक यूरोप ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया चीन के लिथियम निर्यात पर आश्रित है। ऐसे में इस नई खोज से लिथियम को लेकर चीन पर निर्भरता कम हो सकती है।
नेप्च्यून एनर्जी के सीईओ एंड्रियास शेक ने कहा है कि यह नया खोज सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में कंपनी के लाइसेंस क्षेत्रों की महत्वपूर्ण क्षमता को उजागर करता है। उन्होंने बताया, "यह हमें महत्वपूर्ण कच्चे माल लिथियम के लिए जर्मन और यूरोपीय आपूर्ति बाजार में महत्वपूर्ण योगदान करने में सक्षम बनाता है।" यह खोज अंतर्राष्ट्रीय और स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसी स्प्राउल ERCE को सौंपे जाने के बाद हुई है। इस एजेंसी ने बताया है कि जर्मनी में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट का भंडार मौजूद है।
जर्मनी के सैक्सोनी-एनहाल्ट राज्य में स्थित ऑल्टमार्क बेसिन लंबे समय से प्राकृतिक गैस उत्पादन के लिए एक प्रमुख स्थल रहा है। यह कभी यूरोप के सबसे बड़े गैस क्षेत्रों में से एक पर्मियन बेसिन का हिस्सा है जो उत्तरी जर्मनी से होते हुए रूस, यूक्रेन और पोलैंड तक फैला हुआ है। नेप्च्यून एनर्जी और उसकी पूर्ववर्ती कंपनियों ने 1969 से इस क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है। अब हालिया आंकड़े अब दर्शाते हैं कि विशाल ऑल्टमार्क गैस क्षेत्र से रोटलीगेंड ब्राइन न केवल अत्यधिक खनिजयुक्त हैं, बल्कि लिथियम से भी अत्यधिक समृद्ध हैं।
स्प्राउल ERCE ने बताया है कि इस इलाके में 43 मिलियन टन लिथियम कार्बोनेट मौजूद है। इस पर नेप्च्यून एनर्जी का कहना है, "इसका मतलब है कि दुनिया के सबसे बड़े परियोजना-आधारित लिथियम संसाधनों में से एक उत्तरी सैक्सोनी-एनहाल्ट में स्थित है।" तुलना के लिए, अर्जेंटीना, बोलीविया और चिली के बीच साझा लिथियम त्रिभुज में दुनिया के 53 प्रतिशत लिथियम संसाधन मौजूद हैं। इसमें लगभग 50 मिलियन टन क्षारीय धातु है।
भारत के जर्मनी के साथ मजबूत संबंध हैं। दोनों देश न केवल व्यापार बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी एक दूसरे का साथ दे रहे हैं। भारत, जर्मनी के इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्र बिंदु हैं। भारत और जर्मनी के संबंध समान लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित मज़बूत और विश्वसनीय साझेदारी पर टिके हैं, जो आर्थिक, राजनीतिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है और दोनों देश जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, और स्थायी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करते हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार महत्वपूर्ण है, और जर्मनी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक प्रमुख स्रोत है।

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