अक्षत सरोत्री
डिफेंस जर्नलिस्ट
कोलकाता: कोलकाता पुलिस और सरकार की कार्यशैली फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। कारण है एक और रेप का मामला सामने आने से फिर से देश और पश्चिम बंगाल सुर्खियों में आ गया है। ऐसे में सवाल यही है कि आखिर एक के बाद एक रेप के मामले आना क्या कानून व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाते हैं।
घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने बताया कि 25 जून को साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई 24 वर्षीय लॉ छात्रा के बयानों की पुष्टि कई साक्ष्यों से होती है। इनमें पीड़िता के मेडिकल टेस्ट के नतीजे, सीसीटीवी फुटेज, आरोपी के मोबाइल फोन में मिली वीडियो क्लिपिंग और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य शामिल हैं।
इस बीच, मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में तीन और सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "26 जून को पीड़िता की मेडिकल जांच की रिपोर्ट से पता चला है कि उसके गले के आसपास निशान थे। स्तनों पर भी कुछ निशान थे। मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। पीड़िता का मेडिकल लीगल टेस्ट 28 जून को किया गया था।"
प्रथम वर्ष की छात्रा ने आरोप लगाया था कि कॉलेज के संविदा कर्मचारी मोनोजीत मिश्रा, जो एक पूर्व छात्र और तृणमूल कांग्रेस का युवा नेता भी है, और दो मौजूदा छात्रों - जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी - ने 25 जून को शाम 7.30 बजे से 10.50 बजे के बीच सुरक्षा गार्ड के कमरे के अंदर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया।
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